वॉलमार्ट वॉच खुद्रा प्रवेशि‍का (International

वॉलमार्ट वॉच खुद्रा प्रवेशि‍का
“हम संसार भर के लोगों के पैसों की बचत करते हैं ताकि‍ उनका जीवन स्‍तर अच्‍छा हो सके. संसार के सभी भाषा-भाषि‍यों के लि‍ए यह एक अच्‍छी ख़बर है.” – वॉलमार्ट स्‍टोर्स इंकोरपोरेटि‍ड

वॉलमार्ट का अंतर्राष्‍ट्रीय वि‍स्‍तार
मई 2007 के आँकड़ों के मुताबि‍क, वॉलमार्ट के कुल 7,343 स्‍टोर हैं और 14 बाज़ारों में सैम्‍स क्‍लब स्‍थि‍त है. इनमें वि‍श्‍व भर के उसके 20 लाख सहयोगी कार्यरत हैं, जो हर साल 17 करोड़ 90 लाख से ज़्यादा ग्राहकों के लि‍ए काम करते हैं. वॉलमार्ट कोई ऐरी-गैरी कंपनी नहीं है. ये संयुक्‍त राज्‍य अमेरि‍का और संसार की सबसे बड़ी खुद्रा कंपनी है.

सन् 2002 से आज तक वॉलमार्ट फ़ॉर्चून 500 सूची में सबसे ऊपर रही है. सि‍र्फ़ सन् 2006 में ही वह इस सूची में दूसरे स्‍थान पर लुढ़की थी. उस समय पहले स्‍थान पर एक्‍सॉन-मोबि‍ल कंपनी का नाम आया था. “उस साल तेल की वि‍श्‍व कीमतों में 50 प्रति‍शत की बढ़ोतरी की वजह से ही यह संभव हुआ था.  सन् 2008 में वॉलमार्ट की सालाना आमदनी 3.78 खरब डॉलर थी.

वॉलमार्ट संसार भर के लोगों और अपने स्‍त्रोतों को अपने फ़ायदे के लि‍ए इस्‍तेमाल करती है. संसार के हरेक भाषा-भाषी के लि‍ए यह एक कटु सत्‍य है. जैसे- जैसे वॉलमार्ट अपनी अंतर्राष्‍ट्रीय नीति‍ पर और आगे बढ़ना चाह रही है, वैसे-वैसे वह अपने खुद्रा बाज़ार के साम्राज्‍य को भारत और रूस जैसे अन्‍य देशों में बढ़ाने की कोशि‍श कर रही है.

इस प्रवेशि‍का का उद्देश्‍य संसार भर में फैले कार्यकर्ताओं को वॉलमार्ट के खुद्रा वि‍कास रणनीति‍यों और स्‍थानीय खुद्रा संस्‍कारों में कंपनी के प्रभाव के बारे में शि‍क्षि‍त करना है. कि‍सी भी देश में प्रवेश करने से पहले यह कंपनी तीन काम करती है: 1) पहला, वो स्‍थानीय व्‍यापारि‍यों और संगठनों के साथ साझेदारि‍याँ कायम करती है, 2) दूसरा, वह सरकारी अफ़सरों के साथ काम करती है और 3) तीसरा काम, कि‍ वह उभरते हुए मध्‍य वर्ग की क्रय क्षमता में अपनी पैठ बना लेती है. वॉलमार्ट के कि‍सी देश में घुसने से पहले और बाद में, उस देश में क्‍या-क्‍या होता है, इसको प्रकाशि‍त करने के लि‍ए हमने एक अंतर्राष्‍ट्रीय केस अध्‍ययन करने के लि‍ए दो देशों को चुना है. वे देश हैं: मेक्‍सि‍को और भारत.

वॉलमार्ट और मेक्‍सि‍को
यदि‍ हम अन्‍य देशों में वॉलमार्ट के कामों पर नज़र डालें तो हमें अपने देश में भी महत्‍वपूर्ण समानान्‍तर और चेतावनी भरे नि‍शान साफ़ नज़र आएँगे. मेक्‍सि‍को में वॉलमार्ट ने घरेलू खुद्रा व्‍यापारी सि‍फ़्रा के साथ एक संयुक्‍त साझेदारी की और “तेज़ी से बढ़ते हुए” मेक्‍सि‍को के मध्‍य वर्ग में अपनी पैठ बना ली.  वॉलमार्ट के साथ की संयुक्‍त साझेदारी औरों के लि‍ए चाहे एक सि‍रदर्द हो, मगर इससे वॉलमार्ट का प्रभाव और शक्‍ति‍ दोनों बढ़ने लगे. इससे कर्मचारि‍यों का दोहन होने लगा, राजनैति‍क धोखाधड़ी होने लगी और स्‍थानीय संस्‍कृति‍ में गि‍रावट होने लगी और खेती लायक ज़मीन की कमी पैदा होने लगी. 

मेक्‍सि‍को में वॉलमार्ट के व्‍यापारि‍क वि‍कास से वहाँ के घरेलू सप्‍लायरों और ग्राहकों पर गंभीर प्रभाव पड़े हैं. वॉलमार्ट के काम करने के ढंग से “एक चिंता यह उभरी है” कि‍ “वह पैसा बचाने की स्‍थानीय संस्‍कृति‍ का फ़ायदा उठा रही है”. यह और बात है कि‍ “मेक्‍सि‍को में काम करके इसे कभी कोई खास फ़ायदा भी नहीं हुआ.” उदाहरण के तौर पर, वॉलमार्ट के मेक्‍सि‍को में स्‍थि‍त स्‍टोर की बात करें, ये स्‍टोर बैगरों अर्थात स्‍टोर क्‍लर्कों की सेवाएँ तो ले लेते हैं, लेकि‍न इसके बदले “ मेहनताने के तौर पर एक फूटी कौड़ी तक” उन्हें नहीं देते.  मेक्‍सि‍को के अधि‍कारी वॉलमार्ट के इस कार्य को “अत्‍यधि‍क शोषण” और “अन्‍याय” की संज्ञा तक देते हैं. और वे ऐसा इसीलि‍ए कहते हैं, कि‍ मेक्‍सि‍को में इस कंपनी का मुनाफ़ा सन् 2006 के दूसरे क्‍वार्टर में ही 28 करोड डॉलर तक पहुँच चुका था, लेकि‍न फि‍र भी इस अन्‍यायपूर्ण तरीके को इस्‍तेमाल करना उसने नहीं छोड़ा था. 

आज तक भी मेक्‍सि‍को के नागरि‍क वॉलमार्ट के इस घृणि‍त कार्य का वि‍रोध कर रहे हैं और उनमें इसको लेकर असंतोष व्‍याप्‍त है. वॉलमार्ट की मेक्‍सि‍को की राजनीति‍क प्रक्रि‍या में कथि‍त भागीदारी से लोग हिंसक हो उठे थे. विद्रोहि‍यों ने वॉलमार्ट को “मेक्‍सि‍को की राजनीति‍ से दूर रहो” कहते हुए “उसके नकद रजि‍स्‍टरों को रोककर उसके माल-सामान को उठाकर यहाँ-वहाँ फेंक दि‍या था.”

सन् 2007 में वॉलमार्ट को वि‍रोधि‍यों के और ज़्यादा वि‍रोध का सामना करना पड़ा. वे वि‍रोधी “वॉलमार्ट के कर्मचारि‍यों द्वारा एक यूनि‍यन गठि‍त करने के प्रयास का समर्थन” कर रहे थे.  सन् 2008 में, वॉलमार्ट मेक्‍सि‍को के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए क्‍योंकि‍ अन्‍य मजदूरों के मुकाबले वॉलमार्ट में “उनके मैनेजर उनके साथ ज़्यादा बुरा बर्ताव कर रहे थे” और “उन्‍हें ओवरटाइम या और कोई लाभ पैकेज भी नहीं दि‍ए जा रहे थे.”

वॉलमार्ट ने अपने कर्मचारि‍यों का अपमान कि‍या. उनके साथ निंदनीय बर्ताव कि‍या. इतना ही नहीं, इसके अलावा उसने मेक्‍सि‍को की ज़मीन के प्रति‍ भी वही नि‍रादर का भाव दर्शाया है.  जब वॉलमार्ट ने एज़टेक अवशेषों से केवल डेढ़ मील की दूरी पर सैन जुएन टि‍योति‍हुआकैन क्षेत्र में स्‍टोर खोलने का नि‍र्णय लि‍या, तो मेक्‍सि‍को के कुछ नागरि‍क अपने देश की “स्‍वदेशी वि‍रासत” के सर्वनाश के वि‍रोध में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे. वॉलमार्ट स्‍टोर ने न केवल मेक्‍सि‍को की भूमि‍ पर जाकर उसकी “सांस्‍कृति‍क वि‍रासत” को नुकसान पहुँचाया, बल्‍कि‍ उसने वहाँ के “गरारि‍ और मक्‍की के खेतों” को भी नष्‍ट करवा दि‍या था. यह सब उसने एक बड़े बॉक्‍स स्‍टोर “के लि‍ए साफ़ करवाया” था. 

वॉलमार्ट और भारत
सन् 2005 से ही वॉलमार्ट ने भारत में बि‍ज़नेस करने के बारे में सोचना शुरू कर दि‍या था. वॉलमार्ट इंटरनेशनल के तत्‍कालीन प्रमुख जॉन मेंज़र ने उस समय कहा था कि‍ जो कानूनी बाधाएँ अंतर्राष्‍ट्रीय खुद्रा व्‍यापारि‍यों के भारत आने में बाधक हैं, उन्‍हीं के वजह से वॉलमार्ट भी यहाँ अपना व्‍यापार स्‍थापि‍त नहीं कर पाई थी. उच्‍च स्‍तरीय भारत के सरकारी अधि‍कारि‍यों से हुई बातचीत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि‍ उस समय सरकार खुद्रा वि‍क्रेताओं के लि‍ए प्रत्‍यक्ष वि‍देशी नि‍वेश को खोलने के बारे में वि‍चार कर रही थी.

नवंबर 2006 में टेस्‍को के साथ हुई प्रति‍स्‍पर्धा में वॉलमार्ट ने बाज़ी मार ली और भारतीय मोबाइल सेवाओं में अग्रणी, भारती कंपनी के साथ संयुक्‍त उपक्रम लगाने का अवसर हासि‍ल कर लि‍या. उसकी जीत की वजह थी कि‍ उसका रूख खुद्रा मॉडल के वि‍षय में अपने प्रति‍द्वंदी के मुकाबले अधि‍क लचीला था, जि‍ससे उसे भारतीय कंपनी द्वारा अपनाया जा सकता था. भारतीय बाज़ार में जल्‍द से जल्‍द प्रवेश करना ही उस समय कंपनी की प्राथमि‍कता दि‍खाई दे रही थी. जि‍ससे वि‍श्‍व की सबसे बड़ी खुद्रा कंपनी नि‍रंतर बढ़ते हुए भारतीय ग्राहकों में अपनी पैठ बना सके.  दोनों वि‍शाल कॉरपोरेट घरानों के बीच हुए समझौते के अनुसार, भारती आगे रहकर व्‍यापार करेगी और वॉलमार्ट सप्‍लाई चेन, लॉजि‍स्‍टि‍क्‍स और बाकी बैक-एंड कार्यों को संभालेगी.

वॉलमार्ट के साथ एक योजना के तहत, बाज़ार में स्‍थि‍त स्‍टोरों में भारती का शत प्रति‍शत स्‍वामि‍त्‍व रहेगा. वह थोक बिक्री और लॉजि‍स्‍टि‍क्‍स के व्‍यापार में उसके साथ मि‍लकर 50/50 के हि‍साब से संयुक्‍त उपक्रम लगाएगी. भारती ने यह भी कहा था कि‍ वह एक “छोटा-स्‍टोर फ़ॉर्मेट” भी लॉन्‍च करेगी, जि‍सके अंतर्गत वह मौजूदा स्‍थानीय खुद्रा वि‍क्रेताओं के साथ मि‍लकर फ़्रेंचाइजी संधि‍यों करके उनके साथ साझेदारि‍याँ बनाएगी. पहले तो भारती ने कहा था कि‍ वह 2008 के पहले क्‍वार्टर में 10 लाख से ज़्यादा की जनसंख्‍या वाले हरेक शहर में स्‍टोर खोलेगी.  “यदि‍ शोध कहते हैं कि‍ भारती वॉलमार्ट को पसंद कि‍या जा रहा है तो हम भारती वॉलमार्ट बन जाएँगे. यदि‍ शोध कहते हैं कि‍‍ ऐसा करना ज़रूरी नहीं, तो शायद ऐसा होना ज़रूरी भी नहीं.” भारती के प्रमुख सुनील मि‍त्तल ने अखबार को यह बताया था. 

वॉलमार्ट ने सन् 2008 के मध्‍य तक भारत में अपने संयुक्‍त उपक्रम थोक स्‍टोरों को लॉन्‍च करने की योजना बनाई थी. इस योजना में सात सालों के अंदर 75 अन्‍य शहरों तक उसका अपने व्‍यापार को बढ़ाना भी शामि‍ल था.  लेकि‍न तीखे वि‍रोध के कारण, उसे अपनी योजनाओं को सीमि‍त करना पड़ा था. सन् 2008 के अप्रैल महीने में, भारती रि‍टेल ने पंजाब में “ईजी डेज़” के नाम से अपने तीन स्‍टोर चुपचाप लॉन्‍च कर दि‍ए.

भारती के सुनील मि‍त्तल का कहना था कि‍ 90 प्रति‍शत स्‍त्रोत स्‍थानीय बाज़ार से जुटाए जाएँगे. और भवि‍ष्‍य में इस संयुक्‍त उपक्रम के ज़रि‍ए वॉलमार्ट वि‍श्‍व के लि‍ए भारत से स्‍त्रोत जुटाएगा.  प्रस्‍तावि‍त भारती उपक्रम का उद्देश्‍य खुद्रा बाज़ार को कि‍सानों, बढ़इयों, दस्‍तकारों जैसे उत्‍पादकों से माल सीधे सप्‍लाई करने का है.

भारत वॉलमार्ट के लि‍ए एक परि‍पक्‍व और आकर्षक बाज़ार है.  इसका मध्‍य वर्ग 25 करोड़ तक जो पहुँच चुका है! और आज भी यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है. भारत की आर्थि‍क वृद्धि‍ दर भी लगभग 9 प्रति‍शत है¬.  हालांकि‍ देश के वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश से संबद्ध कानून इतने लचीले तो नहीं, लेकि‍न यहाँ के सरकारी अफ़सर भारतीय बाज़ारों में वि‍देशी व्‍यापारि‍यों को शामि‍ल करने के खि‍लाफ़ भी नहीं हैं. अपने पाँच सालों की भारत में प्रवेश करने की कोशि‍शों के दौरान, वॉलमार्ट के एक्‍ज़ीक्‍यूटि‍व्‍स भारत के उच्‍च पदस्‍थ अधि‍कारि‍यों से अक्‍सर मि‍लते रहे हैं. इन अधि‍कारि‍यों की सूची में प्रधानमंत्री और वाणि‍ज्‍य मंत्री तक भी शामि‍ल हैं.

भारत के नागरि‍कों ने खुद्रा व्‍यापार के इस साम्राज्यवाद को दूर तक फैलने नहीं दि‍या है. यहाँ के खुद्रा बाज़ार का नेतृत्‍व 1.2 - 4 करोड़ की संख्‍या में ऐसी छोटी-बड़ी दुकानें करती हैं, जि‍न्‍हें स्‍थानीय परि‍वारों द्वारा छोटे स्‍तर पर चलाया जाता है. इनमें से अधि‍कतर व्‍यवसाय व्‍यवस्‍थि‍त नहीं हैं. परन्‍तु फि‍र भी यह आर्थि‍क सेक्‍टर वि‍श्‍व में दूसरा सर्वाधि‍क रोज़गार प्रदान करने वाला क्षेत्र है. भारत में ऐसी छोटी दुकानों की तादाद काफ़ी अधि‍क है. वॉलमार्ट/भारती संयुक्‍त उपक्रम की घोषणा के बाद, इन छोटी दुकानों के हि‍तों का प्रति‍नि‍धि‍त्‍व करने के लि‍ए एक अग्रणी संगठन का पदार्पण हुआ है. इस संगठन का नाम एफ.डी.आई. वॉच है और यह व्‍यापारि‍यों को वॉलमार्ट के बारे में शिक्षि‍त करती है. इसके अलावा इसने भारती, वॉलमार्ट और अन्‍य बड़ी खुद्रा कंपनि‍यों के खि‍लाफ़ रैलि‍यों और प्रदर्शनों का आयोजन भी कर रखा है. छोटे स्‍थानीय दुकानदारों को एक लाभ यह है कि‍ वे शहरों के बीच में, गलि‍यों के कोनों में, ऐसे ही अन्‍य सुगम स्‍थानों पर मौजूद हैं. इनके अपने अधि‍कतर ग्राहकों के साथ नज़दीकी संबंध होते हैं. लेकि‍न इनके पास बड़े खुद्रा व्‍यापारि‍यों के समान सामानों की वैरायटी मौजूद नहीं रहती.

वॉलमार्ट की अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय असफलताएँ
वॉलमार्ट के लि‍ए अंतर्राष्‍ट्रीय खुद्रा व्‍यापार की असफलताएँ अब कोई नई चीज़ नहीं रह गई हैं. वॉलमार्ट ने दक्षिण कोरि‍या और जर्मनी में लगभग आठ सालों तक ग्राहकों को आकर्षि‍त करने के लि‍ए कड़ी मेहनत की. और अंत में हारकर सन् 2006 में दोनों देशों से अपना बोरि‍या बि‍स्‍तर समेट लि‍या था. यह कंपनी बि‍क्री में कमी और स्‍थानीय वि‍रोधों का सामना तो पहले से कर ही रही थी, इसके साथ ही कंपनी को इन देशों में घाटे में चल रहे ऑपरेशनों को भी 1 अरब डॉलर से भी अधि‍क टैक्‍स-रहि‍त घाटे में बेचना पड़ा. बेन एंड कंपनी नामक परामर्शदाता फ़र्म ने एक शोध कि‍या था जि‍सके नि‍ष्‍कर्ष में उसने कहा “वि‍देशों में पैर पसारने वाली एक-ति‍हाई से भी कम कंपनि‍याँ वि‍देशों में सफलता पाती हैं.”

सि‍योल स्‍थि‍त गुड मार्निंग सि‍क्‍योरि‍टीज़ के एक वि‍श्‍लेषक के अनुसार “वॉलमार्ट की असफलता वि‍श्‍व के एक बड़े व्‍यापारी की दक्षिण कोरि‍या में असफलता का एक अनूठा उदाहरण है…” जब तक वॉलमार्ट ने अपने काम-काज को समेटने का निर्णय कि‍या, उससे पि‍छले साल के आखि‍र तक उसे डेढ़ करोड डॉलर का चूना लग चुका था.
जापान में , “ सन् 2002 में जब से वॉलमार्ट ने सीयू में नि‍वेश किया है, तब से वह कंपनी अति‍ प्रति‍स्‍पर्धात्‍मक बाज़ार में संघर्ष कर रही है. तब से लेकर आज तक उसने वार्षि‍क आधार पर कभी भी शुद्ध लाभ अर्जि‍त नहीं कि‍या है.” सन् 2007 में सीयू ने 20 अरब जापानी मुद्रा येन का घाटा दर्ज कि‍या.  “कम मुनाफ़े से ऐसा लगता है कि‍ आर्कन्‍सॉ की कंपनी की “हर रोज़- कम दाम” की रणनीति‍ में बुरी तरह वि‍फल रही है…”

नि‍ष्‍कर्ष
संयुक्‍त राज्‍य अमेरि‍का में वॉलमार्ट अपना बाज़ार जि‍तना फैला सकती थी, उसने फैला लि‍या है. अब वह वि‍देशों में भी अपना साम्राज्‍य फैलाने की सोच रही है. कंपनी ने जैसी कोशि‍श मेक्‍सि‍को के खुद्रा बाज़ार में घुसने की करी थी, वही अब भारत और वि‍श्‍व के अन्‍य देशों में भी करने जा रही है. जल्‍द ही, वॉलमार्ट रूस और उसके पड़ोसी देशों में भी यही कोशि‍श करेगी. वॉलमार्ट ने अपनी अंतर्राष्‍ट्रीय रणनीति‍ में कुछ आवश्‍यक बदलाव कि‍ए हैं. वि‍श्‍व के नागरि‍कों को भी अब वॉलमार्ट के ख़ि‍लाफ़ लड़ाई लड़ने के लि‍ए एकत्रि‍त होना होगा और अपने प्रयासों को हमेशा सक्रि‍य बनाए रखना होगा. हमें आशा है कि‍ यह प्रवेशि‍का आपके समाज में इस वि‍षय में लोगों की चेतना बढ़ाने का एक लाभदायी स्‍त्रोत साबि‍त होगी. हमें समर्थन देने के लि‍ए कृपया इस वेबपते पर हमसे संपर्क करें- .

Posted by Michael Mignano on Thursday, November 20, 2008

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